Health News: ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट विशेष न्यायाधीश विवेक कुमार ने 15 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया है. जिसमें बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलाने और नकली दवा बेचने के आरोपी को दोषी मानकर 10 साल की सजा और 10 लाख जुर्माना भी लगाया है.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
Health News: उत्तर प्रदेश में आगरा की विशेष न्यायाधीश (ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट) की कोर्ट ने बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलाने और नकली दवा बेचने के मामले में दोषी को 10 साल की सश्रम सजा सुनाई है. इसके साथ ही 10 लाख जुर्माना भी लगाया है. औषधि विभाग ने 2010 में यह मुकदमा दर्ज कराया था. कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद फैसला सुनाया. आरोपी के मेडिकल से जब्त सात दवाएं नकली भी निकली थीं.
बता दें कि सात जनवरी 2010 को तत्कालीन सहायक औषधि नियंत्रक पीपी सिंह को सूचना मिली थी कि मनोज कुमार गुप्ता पुत्र मोहन गुप्ता निवासी ग्राम अहेन महामाया नगर (हाथरस) मौजूदा निवासी प्रकाश नगर नुनिहाई एत्मादउद्दौला में बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चला रहा है. जिस पर आगरा के तत्कालीन औषधि निरीक्षक जेबी सिंह, झांसी के निरीक्षक दिनेश कुमार, कांशीराम नगर के निरीक्षक अनिरुद्ध कुमार, अलीगढ़ के निरीक्षक रमेश चंद यादव की टीम ने दुकान पर छापा मारा. मौके पर दवाओं की बिक्री करते मनोज कुमार गुप्ता मिला था. पूछताछ में मनोज ने बताया कि उसके पास लाइसेंस और दवा खरीद के बिल नहीं हैं. छापेमारी में संदिग्ध दवाएं चार बोरों में जब्त की गईं थीं.
Health News: पुलिस ने एफआर में बताया निर्दोष
पुलिस ने इस मामले में 21 फरवरी 2022 को अंतिम रिपोर्ट दाखिल की. जिसमें बचाव पक्ष का तर्क था कि कोई मेडिकल स्टोर नहीं चलाता है. उससे दवाइयों की खरीद- फरोख्त नहीं होती है. उसे झूठा फंसाया गया है. इसी आधार पर पुलिस ने एफआर लगाई कि आरोपित अभियुक्त मनोज गुप्ता नहीं, बल्कि वह मनोज कुमार पुत्र रामवीर गुप्ता, माता शीला देवी है.
नकली दवा मिलने पर दिया था नोटिस
लखनऊ प्रयोगशाला ने सितंबर 2010 को सात दवाइयों की जांच रिपोर्ट भेजी. जिसमें स्पॉस प्रोक्सीमोन डायक्लोमाइन कैप्सूल, स्वीमाक्स 250 एमजी कैप्सूल, ईजीप्राइन डाइक्लोफेनिक पोटेशियम टैबलेट, डिस्पर-एस टैबलेट, बेटासिन टैबलेट को नकली पाया था. इसमें सक्रिय तत्व बेटामेथासोन की मात्रा शून्य थी. औषधि विभाग ने रिपोर्ट की एक प्रति 7 सितंबर 2010 को मनोज गुप्ता को भी उपलब्ध कराई थी. विभाग ने इसके साथ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया, लेकिन आरोपी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया.
बचाव के सभी तर्क कमजोर साबित
पुलिस का मनोज कुमार को अलग साबित करने वाला तर्क नहीं चला. इंटर की मार्कशीट, सनद पर उसका फोटो नहीं था. अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक एसपी सिन्हा की. उनकी दलीलों के आगे बचाव पक्ष के दावे ध्वस्त हो गए. जिस पर विशेष न्यायाधीश ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट विवेक कुमार ने मनोज कुमार गुप्ता को दोषी करार दिया. दोषी मनोज कुमार गुप्ता को न्यायिक अभिरक्षा के आदेश दिए. इसके साथ ही उसे 10 साल का सश्रम कारावास और 10 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है. अर्थदंड ना देने पर दो साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा.
