Agra News; आगरा में एक युवक ने खुद ही एक लीटर वाली पानी की बोतल अपने मलद्वार में घुसेड ली. बोतल के मलाशय में फंसने से उसकी हालात बिगड़ी. जिस पर हॉस्पिटल में भर्ती कराया. जहां पर डॉक्टर्स ने सर्जरी करके मलाशय से बोतल निकाल कर युवक की जान बचाई है.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
Agra News ; उत्तर प्रदेश जिले के आगरा में एक युवक की अजब गजब हरकत से उसकी ही जान आ गई. युवक ने खुद ही एक लीटर वाली पानी की बोतल अपने मलद्वार में घुसेड ली. जब प्लास्टिक की बोतल उसके मलाशय में फंसी तो हालात बिगड़ी. जिसके चलते युवक को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. जब डॉक्टर्स ने युवक की शिकायत पर एक्सरे किया तो मलाशय में फंसी प्लास्टिक की बोतल दिखी. जिसे देखकर डॉक्टर्स हैरान रह गए. ऐसे में डॉक्टर्स ने तत्काल मरीज की सर्जरी की और मलाशय में फंसी बोतल निकाली. इसके बाद रविवार देर शाम हालत में सुधार होने पर अस्पताल से युवक को डिस्चार्ज कर दिया गया. युवक की ये हरकत एक बीमारी है. जो साइको सेक्सुअल डिसआर्डर एनल इरोटिजिम (गुदा कामुकता) कहते हैं. इस पर युवक की काउंसलिंग की गई है.

बता दें कि मामला शाहगंज थाना की साकेत कॉलोनी स्थित नवदीप हॉस्पिटल आगरा (Agra News) का है. नवदीप हॉस्पिटल के निदेशक व सीनियर सर्जन डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि बीते मंगलवार को 38 साल के युवक को लेकर उसके परिजन आए. युवक ने गुदाद्वार में दर्द की शिकायत थी. जिस पर उसका एक्सरे किया. जिससे पता चला कि युवक के मलाशय में एक लीटर वाली प्लास्टिक की पानी की बोतल फंसी थी. जिससे ही उसे असहनीय दर्द हो रहा है. युवक ने बताया था कि मलाशय में बोतल करीब 36 घंटे से अंदर फंसी है. जिस पर तत्काल डॉ. दीपक और डॉ. भुवेश की टीम के साथ इमरजेंसी में युवक की सर्जरी की. जो करीब 1.10 घंटे तक चली. जिसमें युवक की सर्जरी करके मलाशय में फंसी बोतल निकाली. इस सर्जरी में बोतल बाहर निकालने पर मलाशय के फटने या जख्म होने का खतरा था. ऐसे में बहुत सावधानी रखी गई. जब सर्जरी के घाव भर गए और यवुक को शौच में किसी तरह की परेशानी नहीं होने पर रविवार देर शाम डिस्चार्ज किया है.

साइको सेक्सुअल डिसआर्डर बीमारी से पीड़ित युवक
नवदीप हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि मरीज की केस हिस्ट्री पता की तो पता चला कि वह एक बीमारी से ग्रसित है. जिसे साइको सेक्सुअल डिसआर्डर एनल इरोटिजिम (गुदा कामुकता) कहते हैं. इस बारे में आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने बताते हैं कि साइको सेक्सुअल डिसआर्डर एनल इरोटिजिम की समस्या पश्चिमी देशों में ज्यादा मिलती है. इसमें पीड़ित को अपने ही गुदाद्वार स्पर्श करने में आनंद मिलता है. लिहाजा इससे चलते ही पीड़ित बाहरी वस्तु को खुद अपनी गुदा में डाल लेते हैं. जिससे उनकी जान पर बन आती है. ऐसे मरीजों में एचआईवी, हेपेटाइटिस सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज होने का खतरा अधिक रहता है. ऐसे मरीजों की इस आदत छुड़ाने के लिए दवाओं के साथ ही काउंसलिंग बेहद कारगार है.
