एक पैर पर दस सैंकड तक खड़े नहीं हो पाना सेहत के लिए ठीक नहीं है. ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन’ में प्रकाशित एक रिसर्च में रिसर्चर ने यह दावा किया है. यह रिसर्च 51 से 75 आयु वर्ग के करीब 1702 लोगों पर की गई.
DGCI ने 28 दिसंबर 2021 को वयस्कों में आपातकालीन स्थिति में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी. 9 मार्च 2022 को कुछ शर्तों के अधीन 12 से 17 वर्ष आयु वर्ग में भी इसके उपयोग को मंजूरी दी.
एम्स की रिसर्च के मुताबिक, 28 फीसदी मानसिक रोगी उपचार के लिए पहली बार में आयुर्वेद डॉक्टर्स के पास पहुंचते हैं. इसके साथ ही 12 फीसदी मनोरोगी ही मनोचिकित्सकों के बजाय एलोपैथी के दूसरे डॉक्टर्स के पास उपचार करने पहुंचते हैं.
श्रीपारस हॉस्पिटल में 26 अप्रैल को सुबह सात बजे पांच मिनट के लिए ऑक्सीजन बंद करके मॉकड्रिल करने के चार वीडियो वायरल हुए थे. वायरल वीडियो में श्रीपारस हॉस्पिटल संचालक डॉ. अरिंजय जैन बता रहे थे कि, ऑक्सीजन बंद करके की गई मॉकड्रिल से 22 मरीजों का दम घुटने लगा था. मरीजों के हाथ-पैर नीले…
डॉ. आरती प्रभाकर ने सन 1993 में अमेरिका के तत्कालीन क्लिंटन प्रशासन में राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) के प्रमुख के रूप में कार्य किया था. इसके बाद ओबामा प्रशासन में डॉ. आरती प्रभाकर डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) का प्रमुख रहीं.
आगरा में अधिकारी जिले के 171 आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेेकर वहां पर सुवधाएं जुटाकर आदर्श बनाएंगे. आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली, पानी, साफ-सफाई समेत बच्चों के खेलने-कूदने की बेहतर व्यवस्था की जाएगी.
‘ब्रेन जैपर’ एक इलेक्टिक डिवाइस है. जो, मस्तिष्क में बिजली के हल्के झटकों का अहसास कराती है. जिससे दावा किया जा रहा है कि, ‘ब्रेन जैपर’ से हाई बीपी को कंट्रोल किया जा सकता है.
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, दुनिया में करीब 150 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में कम सुनते हैं. सन 2050 तक यह संख्या बढ़कर 250 करोड़ होने की संभावना है. इसलिए, आज दुनिया में बहरापन एक स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है.
दुनियां में 30 फीसदी मरीजों में कैंसर का पता सही समय पर नहीं हो पाता है. आंकड़ों की करें तो दुनियां मेंं 28 लाख लोगों की मौत कैंसर की वजह से हुई है. इसके साथ ही 2040 तक दुनियाभर में कैंसर के मरीजों की संख्या हो जाएगी.
हर साल बारिश के मौसम में मलेरिया, बुखार और अन्य बीमारियां लोगों को चपेट में लेती हैं. इसलिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान चलाए जाते हैं.
