Health Update: टीबी मुक्त भारत अभियान में आईवीएफ एक चुनौती बन रहा है. केजीएमयू लखनऊ व चंडीगढ़ पीजीआई की रिसर्च में आईवीएफ के बाद महिलाएं टीबी की चपेट में आ रही हैं. टीबी से संक्रमित महिलाओं से जन्मे दस फीसदी शिशु पर भी घातक बैक्टीरिया हमला बोल देता है.
लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
Health Update: देश और उत्तर प्रदेश में पीएम मोदी के टीबी मुक्त भारत अभियान जारी है. इस अभियान के दौरान केजीएमयू न्यूरोलॉजी विभाग व चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टर्स ने दावा किया है कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के बाद महिलाओं में टीबी का खतरा बढ़ जाता है. इससे महिलाओं के कई अंग टीबी की गिरफ्त में आ सकते हैं. टीबी संक्रमित महिलाओं से जन्मे 10 फीसदी शिशु पर भी घातक बैक्टीरिया हमला बोल देता है. ये दावा केजीएमयू न्यूरोलॉजी विभाग व चंडीगढ़ पीजीआई की एक रिसर्च के बाद किया जा रहा है.
बता दें कि लखनऊ के केजीएमयू न्यूरोलॉजी विभाग, जनरल सर्जरी, रेस्पीरेटरी मेडिसिन व चंडीगढ़ पीजीआई ने 73 मामलों में सात अध्ययनों का विश्लेषण किया. जिनकी स्टडी रिपोर्ट एशियन ट्रॉपिकल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है. केजीएमयू न्यूरोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग ने बताया कि 32 वर्ष से अधिक उम्र की 73 महिलाओं पर शोध किया गया. जिनमें आईवीएफ (In Vitro Fertilization) से गर्भधारण करने के 11 से 19 हफ्ते बाद टीबी के लक्षण दिखे हैं. डॉ. आरके गर्ग ने बताते हैं कि 27 फीसदी महिलाओं में जननांग, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र व मिलेरी टीबी की पुष्टि हुई. मिलेरी टीबी में बैक्टीरिया खून के साथ शरीर में फैल जाते हैं. कई अंगों को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं.
केजीएमयू न्यूरोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग ने बताया कि टीबी से पीड़ित 80 फीसदी महिलाओं को इलाज मुहैया कराया गया है. इसमें आठ फीसदी में बिगड़ी यानी ड्रग रजिस्टेंट टीबी का पता चला. बाकी 20 प्रतिशत मरीजों ने इलाज नहीं कराया. इसके साथ ही आईवीएफ अपनाने वाली बाकी 63 फीसदी महिलाएं स्वस्थ पाई गईं.
Health Update: 18 ने मृत शिशु जन्मे
केजीएमयू न्यूरोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरके गर्ग ने बताया कि रिसर्च मेंं 73 महिलाओं में 55 ने जीवित शिशु को जन्म दिया. बाकी 18 महिलाओं ने मृत शिशु को जन्म दिया. रिसर्च में शामिल दो-तिहाई महिलाओं को पहले कभी टीबी नहीं हुई थी. अधिकतर मामलों में टीबी गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के तुरंत बाद हुई.
दवाओं से कमजोर हो जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
रिसर्च में शामिल जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. अक्षय आनंद बताते हैं कि कई महिलाओं को छुपी हुई टीबी होती है. लेकिन, कोई लक्षण नहीं दिखते है. जब ऐसी महिलाएं आईवीएफ कराती हैं, तो इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले हार्मोन और दवाएं शरीर की रोग-प्रतिरोधक ताकत को कमजोर कर देती हैं. जिससे छुपी टीबी सक्रिय हो सकती है. संक्रमित महिलाओं से जन्मे कुछ शिशुओं में भी टीबी की पुष्टि हुई. संक्रमण मां से गर्भ में हो गया. ऐसे शिशुओं में सांस लेने में तकलीफ, जिगर या तिल्ली का बढ़ना और गंभीर संक्रमण जैसे लक्षण दिखे.
