अभियान में प्रत्येक गर्भवती व धात्री महिलाओं तक आयरन, कैल्शियम, एलबेंडाजोल, व फोलिक एसिड की उपलब्धता और दवाओं का सेवन सुनिश्चित करने का कार्य होगा.
मां के दूध में कैल्शियम के साथ तमाम विटामिन और मिनरल होते हैं. जो नवजात या शिशु के की सेहत के लिए बेहद जरूरी होते हैं. स्तनपान से जहां महिलाओं को मातृत्व की सुखद अनुभूति होती है. तो उनके दूध से शिशु को एंटीबॉडीज मिलती हैं. जो इम्युनिटी बूस्टर होती हैं.
भारत की बात करें तो हर साल करीब 13500 महिलाएं गर्भधारण में स्पर्म डोनर का सहारा ले रही हैं. एक इजैक्यूलैट में अनुमानित 280 मिलियन शुक्राणु निकलते हैं. जब पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या 10 मिलियन से कम हो जाए तो उसकी प्रजनन क्षमता कम होती है. जब शुक्राणुओं की संख्या 40 मिलियन और 300…
हरियाली वाले क्षेत्र में रहने वाले बच्चों का आईक्यू का स्कोर 105 था. जबकि, आईक्यू का स्कोर 80 से कम वाले बच्चों में 4 फीसदी बच्चे हरियाली के निम्न स्तर वाले क्षेत्रों में मिले. सामान्य तौर पर देखा जाए तो आईक्यू का स्कोर 90 से 110 के बीच में होता है.
लखनऊ / आगरा.
यूपी में बाल विकास परियोजनाओं को लेकर बुधवार को वेबकास्ट के जरिए समस्त आंगनवाड़ी पर पोषण पाठशाला का आयोजन किया गया. जिसमें विशेषज्ञों ने विभाग की सेवाओं, पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषण शिक्षा और प्रभावी स्तनपान कराने की तकनीकी जानकारी दी. आगरा में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र(एनआईसी) में वेबकास्ट…
रिसर्च में दावा है कि, जो लोग घरों पर नेबुलाइजर इस्तेमाल करते हैं. उन्हें नेबुलाइजर की साफ-सफाई और रख-रखाव की सही जानकारी नहीं होती है. इसलिए गंदे नेबुलाइजर का इस्तेमाल मरीजों को लाभ की बजाय उनकी समस्या गंभीर करता है.
जो गर्भवती कोरोना संक्रमित हुई हैं. उनके गर्भस्थ शिशु में यह जोखिम छह प्रतिशत तक अधिक मिला है. वहीं, उन महिलाओं में जिनमें शुरुआती समय जब में गर्भावस्था जाहिर नहीं होती तो ऐसे समय में शिशुओं की विकास दर में देरी का जोखिम तीन प्रतिशत मिला.
जोसी प्यूकर्ट का दावा है कि, इस प्रक्रिया में मैंने कोई मेडिकल हेल्प नहीं ली है. मैंने और मेरे पार्टनर ने प्रशांत महासागर में शिशु को जन्म देने का फ़ैसला लिया. मगर, हमने प्रेग्रेंसी की कभी कोई स्कैन भी नहीं कराई. यह पूरा प्रोसेस ’फ़्री बर्थ’ है.
बच्चे को यदि दस्त हो रहे हैं तो उसे तत्काल ओआरएस घोल पिलाएं. जिंक की टेबलेट भी दें. जिससे बच्चे में पानी की कमी नहीं होगी. यदि बच्चा ज्यादा परेशान है तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.
Tomato Flu Kerala: बच्चों पर कहर ढा रहा टोमैटो फ्लू, जानें एक्सपर्ट ये बता रहे लक्षण और बचाव के उपाय
केरल में बच्चों के हाथों में गहरे लाल रंग के फफोले दिखाई देते हैं. इस बीमारी की चपेट में ज्यादातर 5 साल से छोटे बच्चे हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि, टोमैटो फ्लू से बच्चों को बचाने के लिए उनकी स्वच्छता पर ध्यान दें और उनके हाइड्रेटेड रहने पर ध्यान दें.
