भारत बायोटेक इंटरनेशनल ने जून 2021 से सितंबर 2021 के बीच दो वर्ष से 18 वर्ष आयु के स्वस्थ बच्चों और किशोरों पर इस टीके के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण किया था.
पहली पल्मोनरी टीबी और दूसरी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की बीमारी होती है. पल्मोनरी टीबी में फेफड़े संक्रमित होते हैं. जिसकी वजह से इसकी फैलने की आशंका रहती है. जबकि, एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी में फेफड़ों के बजाय शरीर के अन्य अंगों पर असर होता है.
रिसर्च में दावा है कि, जो लोग घरों पर नेबुलाइजर इस्तेमाल करते हैं. उन्हें नेबुलाइजर की साफ-सफाई और रख-रखाव की सही जानकारी नहीं होती है. इसलिए गंदे नेबुलाइजर का इस्तेमाल मरीजों को लाभ की बजाय उनकी समस्या गंभीर करता है.
जो गर्भवती कोरोना संक्रमित हुई हैं. उनके गर्भस्थ शिशु में यह जोखिम छह प्रतिशत तक अधिक मिला है. वहीं, उन महिलाओं में जिनमें शुरुआती समय जब में गर्भावस्था जाहिर नहीं होती तो ऐसे समय में शिशुओं की विकास दर में देरी का जोखिम तीन प्रतिशत मिला.
पॉजिटव मंडे में mobycapsule.com एक SERIES लेकर आया है. जिसमें SHEROES की जुबानी ही उनके संषर्घ की दास्तान होगी. कैसे मुश्किल समय में SHEROES ने खुद के फैसले से लक्ष्य प्राप्त किया. SHEROES की पहली कड़ी में सुनिए अभिनेत्री महिला चौधरी की जुबानी.
यह खबर दुनियां के हर डायबिटीज रोगियों के लिए है. अभी जिन डायबिटीज रोगियों को हर दिन इंसुलिन लगाना पड़ता है. उन्हें इस झंझट से मुक्ति मिल जाएगी. इसलिए यह खबर पूरी जरूर पढ़ें.
टीबी चैंपियन अब क्षय रोग के प्रति जागरूकता करेंगे. जिससे टीबी को लेकर व्याप्त भेदभाव और भ्रांतियां दूर हों. इसके लिए टीबी चैंपियन अब पोस्टर, पंपलेट, बैज और टैटू का सहारा लेंगे.
कैल्श्यिम की हैवी डोज: किडनी में स्टोन का खतरा, BP और हार्ट की बीमारियां भी जकड़ेंगी, जानें खात बातें
हाइपरकैल्शिमया से हड्डियां कमजोर होती हैं. पैनक्रियाज भी खराब होती है. इतना ही नहीं, कैल्शियम की हैवी डोज से किडनी में स्टोन, हाई बीपी, हृदय और ब्रेन में भी गड़बड़ियां हो सकती हैं.
, टीबी का इलाज है. इस रोग को हम मात दे सकते हैं. यह कोई मुश्किल काम नहीं है. इसके लिए हमें बस नियमित दवाओं का सेवन करना है. खुद की साफ स फाई रखें और इलाज के दौरान जरूरी परहेज भी करें.
आगरा में स्वास्थ्य विभाग की PCPNDT टीम हाथ पर हाथ रखे बैठी है. मगर, हाल में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग और एसटीएफ की कार्रवाई के बाद आगरा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अपनी किरकिरी बचाने के लिए हरकत में आया है.
