आगरा: आगरा-दिल्ली हाईवे पर सिकंदरा स्थित पुरुषोत्तम दास सावित्री देवी कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर में बिना लाइसेंस और अनुमति के ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से सोमवार को पीईटी-सीटी स्कैन मशीन का लोकार्पण कराया गया था. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है तो विभाग में खलबली मच गयी. आनन-फानन…
मथुरा (उत्तर प्रदेश): मथुरा के वृंदावन में 19 मार्च को फिजियोथेरेपी की नेशनल कॉन्फ्रेंस 'फिजियो नेक्सजेन-3' आयोजित हुई. वृन्दावन के श्रीकृष्णा जन्माष्टमी आश्रम सभागार में 'फिजियो नेक्सजेन-3' के मुख्य अतिथि विधायक व पूर्व ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकांत शर्मा ने दीप प्रज्वलित करके शुभारम्भ किया. इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, आजकल की…
अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग और रेडियोडायग्नोसिस विभाग अब एआई सॉफ्टवेयर में लंग्स की बीमारी से जुड़े 50 मरीजों का डाटा अपलोड करके स्टडी कर रहा है.
पीएम मोदी ने टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए मिशन शुरू किया है जिसके तहत 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाना है. इसलिए, आज टीबी से डरें नहीं. भ्रांति दूर करके टीबी का उपचार कराएं.
कानपुर के जीएसवीएम में 400 स्कूली बच्चों पर स्टडी की गयी है. जिनकी उम्र 15 साल तक रही. स्टडी में 65 प्रतिशत लड़के और 35 फीसदी लड़कियों को शामिल किया गया.
आगरा के होटल होली डे इन में 88वां अमासी स्किल कोर्स व एफएमएएस परीक्षा में देश भर के 200 से अधिक सर्जन्स ने परीक्षा दी.
आगरा (उत्तर प्रदेश).
देश की 50 फीसदी जनता को इलाज के दौरान सर्जीकल मदद नहीं मिल पाती है. क्योंकि, ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है. पहले से देश में सर्जन की कमी है. इसमें नई तकनीकों में ट्रेंड सर्जन्स और ज्यादा कम हैं. यह जानकरी शनिवार को आगरा आए एसोसिएशन ऑफ…
नई दिल्ली.
आज हर दूसरा व्यक्ति नींद से जुड़ी परेशानी से जूझ रहा है. किसी को भरपूर नींद नहीं आती तो किसी की रात में नींद टूट जाती है. जिससे लोगों में तमाम तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारी पनप रही हैं. देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो लगभग एक चौथाई लोग बिना…
केंद्र और यूपी सरकार की जारी गाइडलाइन में इन्फ्लूएंजा (H3N2) पीड़ितों के ट्रीटमेंट में कोविड प्रोटोकाल का पालन किया जाय. श्वसनतंत्र पर संक्रमण के लक्षणों को गंभीरता से लिया जाए. ऑक्सीजन लेवल 90 या कम होने पर तत्काल एडमिट हों.
अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से एक ही छत के नीचे गर्भवती की डिलीवरी, नवजात और प्रसूताओं को बेहतर उपचार मिलेगा.
