टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु से होता है. टीबी प्रमुख रूप से दो तरह की होती है. पहली पल्मोनरी टीबी और दूसरी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी है. टीबी रोगी के संपर्क में आने वाले परिवार के लोगों को भी टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) दी जा रही है. वैसे भी
पहली पल्मोनरी टीबी और दूसरी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की बीमारी होती है. पल्मोनरी टीबी में फेफड़े संक्रमित होते हैं. जिसकी वजह से इसकी फैलने की आशंका रहती है. जबकि, एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी में फेफड़ों के बजाय शरीर के अन्य अंगों पर असर होता है.
टीबी चैंपियन अब क्षय रोग के प्रति जागरूकता करेंगे. जिससे टीबी को लेकर व्याप्त भेदभाव और भ्रांतियां दूर हों. इसके लिए टीबी चैंपियन अब पोस्टर, पंपलेट, बैज और टैटू का सहारा लेंगे.
, टीबी का इलाज है. इस रोग को हम मात दे सकते हैं. यह कोई मुश्किल काम नहीं है. इसके लिए हमें बस नियमित दवाओं का सेवन करना है. खुद की साफ स फाई रखें और इलाज के दौरान जरूरी परहेज भी करें.
टीबी रोग को जड़ से खत्म करने की मुहिम में आयुष चिकित्सकों की अहम भूमिका रहेगी. इसलिा सरकार ने यूपी में आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी चिकित्सक हैं, जो निजी क्लीनिक संचालक हैं. वे भी अब टीबी मरीजों की सूचना भी निःक्षय पोर्टल पर दर्ज करेंगे.
