UPORTHOCON-2026: आगरा में आयोजित यूपी ओर्थोपेडिक एसोसिएशन और आगरा ओर्थोपेडिक सोसायटी की 50वीं गोल्डन जुबली कॉन्फ्रेंस में देशभर से 1000 आए हैं. यूपी ओर्थोकॉन तीन दिवसीय है.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
UPORTHOCON-2026: आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और रोबोट की मदद से हड्डियों की सर्जरी में 40 फीसदी तक बेहतर नतीजे आ रहे हैं. इसके साथ ही बीमारी की जांच, सर्जरी से पहले की तैयारी, सर्जरी, सर्जरी के बाद की देखभाल तक में एआई का उपयोग कमाल का है. एआई और रोबो की बात करें तो आने वाले समय में आर्थोपेडिक्स सर्जन्स की जरूरत ये बनेंगे. ये बातें आगरा में आयोजित तीन दिवसीय यूपी ओर्थोकॉन में आए अस्थि रोग विशेषज्ञों ने कही.
बता दें कि आगरा में यूपी ओर्थोपेडिक एसोसिएशन और आगरा ओर्थोपेडिक सोसायटी की 50वीं गोल्डन जुबली कांफ्रेंस यूपीओर्थोकॉन-26 हो रही है. जो तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस हैं. आयोजन सचिव डॉ. अमृत गोयल ने बताया कि देशभर के करीब एक हजार अस्थि रोग विशेषज्ञ प्रतिभाग गोल्डन जुबली कॉन्फ्रेंस में प्रतिभाग कर रहे हैं. जो अस्थि रोग और इस विधा में नए इनोवेशन पर मंथन कर रहे हैं.पहले दिन रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की कार्यशाला आयोजित हो रही है. जिसमें देशभर से 1000 चिकित्सक प्रतिभाग कर रहे हैं. यूपी ओर्थोकॉन का शुक्रवार देर शाम शुभारंभ हुआ. ये रविवार तक चलेगी.

सर्जरी और ‘पोस्ट आपरेशन’ में भी एएआई मददगार
प्रयागराज से आए यूपी ओर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पीयूष मिश्रा ने एआई के इस्तेमाल, प्रभाव और भविष्य पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि हड्डियों की बीमारी, क्लीयर फ्रैक्चर तो आंखों से दिखाई दे जाता है. लेकिन, कई बार छुपे हुए फ्रैक्चर, नुकसान दिखाई नहीं देते हैं. इसी तरह ट्यूमर भी दिखाई नहीं देते हैं. एआई की बात करें तो ‘पैथोलॉजिकल टूल’ ट्यूमर को बताता है. आगे चलकर मरीज को अर्थराइटिस होगा या नहीं, यानि ‘रिस्क प्रिडिक्शन’ भी एआई करता है. सर्जरी के दौरान लिगामेंट में गड़बड़ी को खोजकर उसका संतुलन भी बनाता है. इतना ही नहीं, ‘पोस्ट आपरेशन’ यानि सर्जरी के बाद मरीज के अंगों में एक डिवाइस लगाकर उसकी गतिविधि का पता लग जाता है. जिसमें मरीज ठीक से दवाइयां ले रहा है, परहेज कर रहा है या नहीं. इसका हिसाब भी एआई रख रहा है. जिससे डॉक्टर को इलाज में मदद मिलती है. भविष्य में होने वाले संक्रमण को भी बता देता है. अभी रोबो की कीमत 5-6 करोड़ है. देशी रोबो आने पर इसमें गिरावट आएगी.
UPORTHOCON-2026: मरीज के मुताबिक बन जाएंगे अंग
डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि घुटने, कंधे, कूल्हे बदलने की स्थिति में इंप्लांट (अंग) अधिकतर पहले से बाजार में उपलब्ध होते हैं. लेकिन, हर मरीज का शरीर, आकार-प्रकार अलग होते हैं. उनके लिए उसी तरह के इंप्लांट चाहिए. इसमें भी एआई काम करता है. ‘पर्सनलाइज इंप्लांट’ के तहत मरीज के अंग की थ्रीडी प्रिंटिंग बन जाती है. जिससे अंग बनाने वाली कंपनी से मरीज के मुताबिक फिट इंप्लांट तैयार कर सकती हैं.
सुबह 40 मिनट तक धूप लेना जरूरी
डॉ. पीयूष मिश्रा ने बताया कि सुबह प्रदूषण का स्तर बहुत कम रहता है. उस समय की किरणें बहुत प्रभावशाली होती हैं. औसतन 40 मिनट की धूप पर्याप्त है, लेकिन शरीर को अधिक से अधिक खुला रखें. विशेषकर हाथ और पैर. सनस्क्रीन से भी नुकसान होता है, चेहरे पर लगाएं मगर हाथ पर लगाना ठीक नहीं है. देर तक जागना और देर से उठने पर नाश्ता छूट जाता है. दिनचर्या बिगड़ती है, हड्डियां प्रभावित होती हैं.
विटामिन-डी से शुगर भी रहता संतुलित
डॉ. पीयूष मिश्रा बताते हैं कि हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए विटामिन-डी बहुत जरूरी है. यह फ्री में केवल धूप से मिल सकती है. बहुत से लोग जिम जाते हैं लेकिन वहां धूप नहीं होती. धूप लेने पर सिर्फ विटामिन-डी की कमी पूरी नहीं होती बल्कि इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. सबसे अच्छी बात यह कि डायबिटीज रोगियों में यह शुगर का स्तर भी संतुलित रखता या घटा देता है.
उद्घाटन में ये रहे विशेषज्ञ मौजूद
यूपीओर्थोकॉन में कोलकाता के डॉ.राजीव रमन, सूरत से डॉ.धवल देसाई ने व्याख्यान दिए. कार्यक्रम का संचालन डॉ.रजत कपूर ने किया. आयोजन अध्यक्ष डॉ.अरुण कपूर, संयोजक डॉ.अशोक विज, डॉ.संजय धवन, आगरा आर्थोपेडिक्स सोसायटी के अध्यक्ष डॉ.अतुल अग्रवाल, सचिव डॉ.अनुपम गुप्ता, डॉ.रवि सबरवाल, डॉ.अतुल श्रीवास्तव, डॉ.आरके अरोड़ा, डॉ.गौरव राजपाल, डॉ.राकेश मोहनिया, डॉ.विवेक मित्तल, डॉ.केएस दिनकर, डॉ. विपुल अग्रवाल, डॉ.सोविक यादव, डॉ.शुभम खंडेलवाल, डॉ.राजेश गोयल रहे.
