World Tuberculosis Day: आगरा जिले की बात करें तो मौजूदा समय में 30518 पंजीकृत क्षय रोगियों का इलाज चल रहा है. तेजी से आगरा में टीबी मरीज उपचार से ठीक हो रहे हैं.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
World Tuberculosis Day: टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं रह गई है. सही समय पर शुरू किए गए इलाज से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं. रोग अधिक बिगड़ने के बाद भी इलाज से राहत मिल रही है. टीबी (World Tuberculosis Day) की रोकथाम और इलाज में आगरा प्रदेश में सबसे आगे हैं. यहां इलाज के बाद 96 फीसदी से अधिक मरीजों ने टीबी को बाय-बाय किया है. ये मरीज अब पूर्ण स्वस्थ हैं.
बता दें कि टीबी संक्रामक रोग है, जो माइको बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया से फैलता है. यह दो प्रकार की होती है. पहली पल्मोनरी टीबी फेफड़ों में पाई जाती है. दूसरी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी जो शरीर के दूसरे अंगों की टीबी होती है. इस बीमारी का पूरा इलाज उपलब्ध है.

ढाई महीनों में 6481 नए मरीज
जनवरी 2026 से लेकर अब तक जिलेभर में कुल 6481 नए टीबी मरीजों की खोजबीन की गई है. इनमें से निजी अस्पतालों में 3477 और सरकारी अस्पतालों में 3004 मरीज खोजे गए हैं. यानि अब सरकारी की अपेक्षा निजी क्षेत्र में अधिक मरीजों की खोजबीन हो रही है. हालांकि सभी को सरकार के निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत किया जा रहा है.
इन स्थानों पर उपलब्ध जांच और इलाज
टीबी उन्मूलन के लिए जिलेभर में स्वास्थ्य केंद्रों का जाल बिछा है. जिले में 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी), 26 टीबी यूनिट, 44 प्राइमरी हेल्थ इंस्टीट्यूट (पीएचआई) और 30 अर्बन पीएचसी पर हर महीने 15 तारीख को निक्षय दिवस मनाया जाता है.

2025 तक के आंकड़े
नोटीफाई मरीज:- 30518
सरकारी में पंजीकृत:- 13766
निजी में पंजीकृत:- 16590
पुरुष मरीज:- 17085
महिला मरीज:- 13421
डीआरटीबी मरीज:- 1049
कुल निक्षय मित्र:- 3068
पोटली वितरण:- 4381
टीबी मुक्त पंचायतें:- 47
99 प्रतिशत तक पहुंचने की कोशिश
आगरा सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जिले की सफलता दर बहुत अच्छी है, लेकिन हम 99 प्रतिशत तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. टीबी रोग से होने वाली मृत्यु को बेहद कम करना है. इसके लिए लोगों को जल्द इलाज शुरू कराने की जरूरत है.
डॉक्टरों की काउंसलिंग से बढ़ा हौसला
सिकंदरा के 42 साल के युवक लंबे समय से धूम्रपान कर रहे थे. जब लक्षण उभरने पर जांच कराई तो टीबी की पुष्टि हुई. जिस पर डॉक्टरों ने काउंसलिंग की. नियमित दवाएं लेने की सीख दी. इलाज-हौसले से बीमारी ठीक हो गई. सैंया निवासी 46 साल के व्यक्ति ने बताया कि बुखार के साथ खांसी भी रहती थी. इससे कामकाज नहीं कर पा रहा था. जांच कराने पर टीबी का पता चला. ऐसा लगा कि अब ठीक नहीं हो पाऊंगा, लेकिन दवाओं, काउंसलिंग और पौष्टिक आहार से बीमारी ठीक हुई. अब फिर से काम करना शुरू कर दिया है.

बीमारी हुई ठीक, फिर से शुरू किया कामकाज
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि आगरा में बीते साल में टीबी की दवा और मरीजों के हौसले से बीमारी ठीक हुई है. जिससे ही जिले में 47 और गांव टीबी मुक्त हो गए. बीते दो साल में आगरा जिले के 133 गांवों से टीवी की छुट्टी हुई है. स्वास्थ्य विभाग ने बीते साल घर-घर कर 7.51 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की. जिसमें 30518 मरीज टीबी के मिले. दवाएं, पौष्टिक भोजन और काउंसलिंग के असर से 27,159 मरीज पूरी तरह से ठीक हो गए. पहली बार इतनी तादाद में लोगों ने टीबी को हराया है. जिसमें 47 गांवों में अब टीबी का मरीज नहीं है. प्रदेश में आगरा टीबी चिह्नित करने में दूसरे और टीबी मुक्त गांवों के मामले में तीसरे स्थान पर है.
टीबी के मुख्य लक्षण
- 15 दिन से अधिक दिन तक खांसी.
- सांस फूलना और बलगम में खून आना.
- लगातार बुखार आना, वजन कम होना.
- भूख न लगना, रात को पसीना आना.
- गले-बगल और रीढ़ की हड्डी में गांठ.
ये हैं टीबी मुक्त गांव
नागर, अरसेना, इकराम नगर, शगुनपुर, गुंजावली, पडकौली, रामपुर चंद्रसैनी, रायपुरा भदौरिया, बहेटा, गंगौरा, लोधई, सुजानपुर, बिरुनी, सुरोठी, बदनपुर वर्नामई, चचौंध, बड़ागांव, नथौली, खेरिया, ऊंचा, बसई खेआगढ़, अर्जुनपुरा, बाघराना, बरेदा, बसई अरेला, मरी नगला, हुसैनपुरा, कांकरखेड़ा, मनोना, उदयपुर खालसा, शाहपुर खालसा, बसई भदौरिया, थापेनरा, सरपुर, डारकी, शाहपुर नदीम, मोहनपुर, सियारमऊ, भिड़ावली, मंगलपुर बंत्रा, नगला धीर, रोहई खास, सेवला गोरवा, थाप खार्ग,
