Newborn Screening Test: बच्चे के पैदा होते ही ‘न्यू बोर्न स्क्रीनिंग टेस्ट’ से सुनने-बोलने की क्षमता का पता चल जाता है. जिससे जल्द उपचार शुरू किया जा सकता है. बच्चों का तीन साल की उम्र तक काक्लियर इंप्लांट करने से बेहतर परिणाम आते हैं. अब बुजुर्गों का भी काक्लियर इंप्लांट किया जा रहा है. उत्तर भारत में भी खूब सर्जरी हो रही हैं.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
Newborn Screening Test: हर एक हजार में से औसतन 3 बच्चे बोलने और सुनने की समस्या से ग्रसित हैं. जिन्हें काक्लियर इंप्लांट की जरूरत पड़ रही है. इसलिए जन्म (Newborn Screening Test) के समय ही शिशुओं की जांच करा लेना सबसे बेहतर रहता है. जितना जल्दी संभव हो, इलाज करा लेना चाहिए. आगरा में चार दिवसीय 23वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस सीजीकॉन- 2026 में देश और विदेश से करीब 600 से अधिक ENT विशेषज्ञ जुटे हैं. जो मूक-बधिर बच्चों में किए जाने वाले कॉक्लियर इम्प्लांट की नई टेक्नोलॉजी, जांच-उपचार के बारे में मंथन कर रहे हैं. कॉन्फ्रेस में दूसरे दिन मुंबई की वरिष्ठ ईएनटी सर्जन पद्मश्री डॉ. मिलिंद कीर्तने ने यह जानकारी दी कि बेहतर भविष्य के लिए बच्चों का शिक्षित होना बेहद जरूरी है.
वरिष्ठ ईएनटी सर्जन पद्मश्री डॉ. मिलिंद कीर्तने ने बताया कि बच्चे शिक्षित हों. इसके लिए जरूरी है कि बच्चों के अच्छा सुनना और बोलना बड़ी जरूरत है. इसलिए अभिभावकों को जागरूक होकर बच्चे के पैदा होने के तुरंत बाद ‘न्यू बोर्न स्क्रीनिंग टेस्ट’ (Newborn Screening Test) जरूर कराना चाहिए. जिससे बच्चे की बोलने और सुनने की क्षमता का पता लगता है. जिससे जरूरत होने पर उसका तत्काल इलाज और कॉक्लियर इंप्लांट कराएं. कॉक्लियर इंप्लांट के लिए अब केंद्र और राज्य सरकारें भी मदद कर रही हैं. उन्होंने कॉक्लियर इंप्लांट की सर्जरी पर भी प्रकाश डाला.
आज होगा विधिवत उद्घाटन
आयोजन अध्यक्ष डा.राजीव पचौरी, सचिव डा.मीनाक्षी बढ़ेरा, कोषाध्यक्ष डा.गौरव खंडेलवाल ने बताया कि चार दिनी कांफ्रेंस के दूसरे दिन कई सत्रों में व्याख्यान हुए. जिसमें यूनाइटेड किंगडम के डॉ.माइकल ग्लुथ, यूएसए की डॉ.स्वेतलाना बर्नोस, चेन्नई के डॉ.मोहन कामेश्वरन जैसे दिग्गज शामिल रहे. पैनल चर्चा में नए इलाज, सर्जरी के अनुभव साझा किए गए. कांफ्रेंस का विधिवत उद्घाटन शनिवार को केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल करेंगे.
मैं जिस बच्चे की सर्जरी, वो आज युवा Newborn Screening Test
पुणे से आए डॉ.नीलम वैद्य ने बताया कि काक्लियर इंप्लांट में अगर बेहतर नतीजे चाहिए तो बच्चे की सर्जरी तीन साल के अंदर कराना जरूरी है. जितना देरी यह कराएंगे. नतीजे उतने अच्छे नहीं आएंगे. मैंने आगरा के पहले बच्चे की काक्लियर इंप्लांट सर्जरी की थी. इसमें डॉ.राजीव पचौरी ने सहयोग किया था. आज बच्चा युवा है और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है.
उत्तर भारत में काक्लियर इंप्लांट बढ़ा
चेन्नई के डॉ.मोहन कामेश्वरन ने बताया कि इस मामले में अभी तक दक्षिण भारत में जागरूकता का स्तर अधिक था. वहां सर्जरी अधिक हो रही थीं. लेकिन खुशी है कि अब उत्तर भारत में भी लोग पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं. अगर उनके बच्चों की सुनने और बोलने की क्षमता कम है तो काक्लियर इंप्लांट सर्जरी कराकर बढ़ा रहे हैं.
बुजुर्गों की काक्लियर इंप्लांट सर्जरी
बेंगलुरू से आए डॉ.सुनील दत्त ने बताया कि कहा कि कॉक्लियर इंप्लांट अब सिर्फ बच्चों की विशेष सर्जरी नहीं रह गई है. यह हर उम्र के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. बच्चों के अलावा अब जरूरतमंद लोगों और बुजुर्गों की सर्जरी भी की जा रही है. इससे उनके सुनने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है. आम तौर पर यह समस्या 60 साल के बाद सामान्य रूप से देखने में आती है.
