सुपोषण दिवस पर गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गई. गोद भराई कार्यक्रम को बेहतरीन बनाने के लिए लोक गीत भी गाए गए. इन लोक गीत के जरिए भी लोगों को सही पोषण देने और लेने को लेकर जागरूक किया.
दुनिया में मंकीपॉक्स तेजी से फैल रहा है. अब तक 74 देशों में मंकीपॉक्स पैर पसार चुका है. जिससे असाधारण हालात पैदा हो रहे हैं. क्योंकि, अब तक विश्व में मंकीपॉक्स के 16886 से ज्यादा मंकीपॉक्स के मरीज मिल चुके हैं.
अक्सर करके बच्चे कुछ भी उठाकर मुंह में डाल लेते हैं. या फिर नंगे पांव ही संक्रमित स्थानों पर चले जाते हैं. जिससे उनके पेट में कीड़े पनप जाते हैं. इसलिए एल्बेन्डाजॉल खाने से बच्चों के पेट में पनपे कीड़े पेट से बाहर हो जाते हैं.
एक से 19 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चे और किशोरों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए प्रदेश में वर्ष में दो बार अभियान चलाया जाता है. इस साल राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस बुधवार यानी (20 जुलाई) को है.
हरियाली वाले क्षेत्र में रहने वाले बच्चों का आईक्यू का स्कोर 105 था. जबकि, आईक्यू का स्कोर 80 से कम वाले बच्चों में 4 फीसदी बच्चे हरियाली के निम्न स्तर वाले क्षेत्रों में मिले. सामान्य तौर पर देखा जाए तो आईक्यू का स्कोर 90 से 110 के बीच में होता है.
लखनऊ / आगरा.
यूपी में बाल विकास परियोजनाओं को लेकर बुधवार को वेबकास्ट के जरिए समस्त आंगनवाड़ी पर पोषण पाठशाला का आयोजन किया गया. जिसमें विशेषज्ञों ने विभाग की सेवाओं, पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषण शिक्षा और प्रभावी स्तनपान कराने की तकनीकी जानकारी दी. आगरा में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र(एनआईसी) में वेबकास्ट…
आगरा में बच्चों की बदली फूड हेविट से उन्हें पेट में दर्द, उल्टी दस्त, अपच, पीलिया, हीमोग्लोबिन कम होना, पेट में अल्सर की शिकायत जैसी अन्य परेशानी सता रही हैं. इसलिए बच्चों को फास्ट-जंक फूड देने से परहेज करें.
हम वजन की बात करें तो यूपी के बच्चे ज्यादा हट्टे-कट्टे हैं. यानी यूपी के बच्चे हेल्दी हैं. उनका वजन सही है. जबकि, यूपी के बच्चों की तुलना में बिहार, झारखण्ड, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों के बच्चों का वजन कम है.
भारत बायोटेक इंटरनेशनल ने जून 2021 से सितंबर 2021 के बीच दो वर्ष से 18 वर्ष आयु के स्वस्थ बच्चों और किशोरों पर इस टीके के दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण किया था.
रिसर्च में दावा है कि, जो लोग घरों पर नेबुलाइजर इस्तेमाल करते हैं. उन्हें नेबुलाइजर की साफ-सफाई और रख-रखाव की सही जानकारी नहीं होती है. इसलिए गंदे नेबुलाइजर का इस्तेमाल मरीजों को लाभ की बजाय उनकी समस्या गंभीर करता है.
