यूपी में सात अगस्त को समस्त जिले के जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर बने कोविड टीकाकरण केंद्रों पर मेगा कैंप लगेगा. जिसमें 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोविड टीका की एहतियाती डोज लगाई जाएगी.
Health News: बच्चों को पिलाई विटामिन-ए की खुराक, तीन सितंबर तक 4.9 लाख मासूमों को दवा देने का लक्ष्य
विटामिन-ए ऐसा विटामिन है तो वसा में घुलनशील विटामिन है. विटामिन-ए से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. अभियान में अभिभावक अपने नौ माह से पांच साल तक की उम्र के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक जरूर पिलाएं.
यूनिसेफ के पोषण प्रमुख डॉ. अर्जन डी वाग्ट की मानें तो भारत में बच्चा का ओवरवेट होना एक बड़ी समस्या है. शरीर में बहुत अधिक वसा से गैर.संचारी रोग (टाइप 2 डायबिटीज, दिमाग, किडनी, हड्डी, लिवर की बीमारियां, कैंसर और विकलांगता) जैसे बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है.
विटामिन-ए वसा में घुलनशील विटामिन है. जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. अभियान मेें सभी अभिभावक अपने नौ माह से पांच साल तक की उम्र के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक अवश्य पिलाएं.
निरोगी काया के लिए योगासन बेहद जरूरी हैं. योग चिकित्सा हमारी प्राचीन काल की है. यह वैदिक चिकित्सा है. इस चिकित्सा से उपचार करने पर लोगों को तमाम असाध्य रोगों में लाभ मिलता है.
मंकीपॉक्स का संक्रमण कोरोना के संक्रमण से कम संक्रामक है. लेकिन, इसमें भी बच्चों पर ज्यादा जोखिम है. चलिए जानते हैं कि, बच्चों से लेकर बुजुर्गों को मंकी पॉक्स से बचाव के लिए क्या करना चाहिए ? पुरुषों के लिए डब्ल्यूएचओ की क्या सलाह है?
डीएम आगरा की ओर से पत्र जारी किया गया है. जिसके जरिए सभी ग्राम प्रधानों से अपील की है कि, ग्राम सभा, ग्राम पंचायत की बैठक और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) की बैठक में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य विषयक समस्या पर चर्चा करें.
दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर रखने में यह अंतरा बेहतर विकल्प है. इसकी डोज प्रत्येक तीन माह में एक बार लेनी होती है.
र, यूरोपीय देशों और अमेरिका में चेचक का टीका लगाकर इसका इलाज किया जा रहा है. यूरोपीय देश इम्वेनेक्स वैक्सीन लगा रहे हैं. इसे डेनिश दवा कंपनी बवेरियन नॉर्डिक ने तैयार किया है. जाइनॉस की भी दो खुराक दी जा रही है.
सुपोषण दिवस पर गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गई. गोद भराई कार्यक्रम को बेहतरीन बनाने के लिए लोक गीत भी गाए गए. इन लोक गीत के जरिए भी लोगों को सही पोषण देने और लेने को लेकर जागरूक किया.
