नई दिल्ली.
देश की महिलाओं में मोटापा, खानपान और खराब जीवनशैली ही रक्तचाप (blood pressure) के लिए जिम्मेदार नहीं है. महिलाओं में बढते ब्लड प्रेशर (blood pressure) की वजह लैंगिक अपराध भी है. जिसमें घरेलू हिंसा, ज्यादा बच्चे पैदा करना भी एक बडा कारण है. इससे भी महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ा…
अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से एक ही छत के नीचे गर्भवती की डिलीवरी, नवजात और प्रसूताओं को बेहतर उपचार मिलेगा.
आगरा: ताजनगरी में झोलाझाप अब क्लीनिक के साथ ही अब मेडिकल स्टोर और पैथोलाजी सेंटरों पर भी बीमारों का इलाज करके उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं. जिले में बुधवार देर शाम तक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ ही पुलिस, प्रशासन की छापेमार कार्रवाई में चली. जिसमें टीमों को ग्वालियर रोड पर अवैध…
नई दिल्ली.
दुनिया में 5.5 करोड़ से अधिक डिमेंशिया से पीड़ित हैं. हर साल एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं. भारत की हालत बहुत चिंताजनक है. भारत के एक करोड़ से अधिक बुजुर्ग डिमेंशिया की चपेट में आ सकते हैं. सबसे ज्यादा जम्मू-कश्मीर में डिमेंशिया के मरीज हैं. बात करें तो देश में डिमेशिया…
‘मोंक फ्रूट’ में मोग्रोसाइड्स (Mogrosides) नामक यौगिक होता है. जिसकी वजह से ही इसकी तीव्र मिठास होती है. अब तक जितने भी अध्ययन हुए हैं. उन सभी में मधुमेह रोगियों के लिए मोंक फ्रूट सुरक्षित पाया गया है.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आगरा की ओर से रविवार को शहर के छह पार्कों में जन जागरूकता अभियान चलाया गया. जिसमें डॉक्टर्स होली पर स्वस्थ और सुरक्षित रहने के टिप्प दिए.
आगरा में उत्तर प्रदेश टॉस्क फोर्स की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है. इसके साथ ही कमजोर प्रदर्शन करने वाले मेडिकल कालेजों को चेतावनी भी दी गई.
केंद्र सरकार अब ई संजीवनी में चार नए फीचर जोड़े जा रहे हैं. जिसमें सबसे महत्वपूर्ण फीचर टेलिडायग्नोस्टिक का है. जिसके तहत वेलनेस केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की सभी जांच मशीनों को ई संजीवनी पोर्टल से जोड़ी जा रही हैं.
आगरा.
देश और दुनियां में तेजी से फिशर, पाइल्स, फिस्टुला, कोलन कैंसर की समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में जरूरत है कि, नई तकनीकी से सर्जन्स को ट्रेंड किया जाए. आगरा में आयोजित वल्र्डकाॅन 2023 में आईएससीपी ने तीन वर्ष में 20 हजार सर्जन्स को सर्जरी की नई तकनीकि में ट्रेंड करने की योजना बनाई…
आगरा में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस आफ कोलो प्रोक्टोकालोजी में नई तकनीकी पर चर्चा की गई. जिसमें बताया गया कि, भारत में मात्र 20 फीसदी सर्जन की नई तकनीकी का प्रयोग कर रहे हैं.
