16 जनवरी 2021 को देश में फ्रंट लाइन वर्कर्स के कोरोना टीका लगाने की शुरूआत हुई थी. 18 महीने में देश ने एक ऐसे मुकाम पाया है, जो बड़े-बड़े देश नहीं पा सके हैं. देश आज करीब दो अरब वैक्सीन लगाने का आंकड़े को छू चुका है.
हरियाली वाले क्षेत्र में रहने वाले बच्चों का आईक्यू का स्कोर 105 था. जबकि, आईक्यू का स्कोर 80 से कम वाले बच्चों में 4 फीसदी बच्चे हरियाली के निम्न स्तर वाले क्षेत्रों में मिले. सामान्य तौर पर देखा जाए तो आईक्यू का स्कोर 90 से 110 के बीच में होता है.
इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन ने इस दुर्लभ रक्त समूह का नाम ईएमएम निगेटिव रखा है. इसमें ईएमएम नहीं होता है. ईएमएम लाल रक्त कोशिकाओं में एंटीजन होता है. इस रक्त समूह के व्यक्ति न किसी को खून दे सकते हैं और न ही उन्हें किसी का खून चढ़ाया जा सकता है.
दिल्ली एम्स प्लास्टिक सर्जरी कराने के लिए 50 फीसदी से अधिक मरीज ट्रॉमा से आते हैं. जिनकी प्लास्टिक सर्जरी जटिल होती है. देश में लगभग 2500 प्रशिक्षित प्लास्टिक सर्जन हैं. जो अपनी कार्य कुशलता से लोगों की जिंदगी संवार रहे हैं.
यूरोप में 21 दिन तक 64 लोगों पर रिसर्च की गई. जिसमें भूख के स्तर और भावनात्मक स्वास्थ्य को विभिन्न पैमानों से मापा. ऐप के जरिए हर प्रतिभागी में भूख स्तर की रोजाना पांच बार रिपोर्ट दर्ज की गई. जिसमें चिड़चिड़ापन और क्रोध में वृद्धि देखी गई.
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में दिल्ली एम्स का एक रिसर्च पेपर प्रकाशित हुआ है. जो भारत समेत दुनियाभर के लोगों में कोरोना संक्रमण के बाद होने वाली पेट से जुड़ी बीमारियों पर की गई स्टडी पर आधारित है.
नैरोबी फ़्लाई (नैरोबी मक्खी) अफ्रीकन मूल की है. जो सात हजार किलोमीटर दूर से यहां पर आई है. यह नैरोबी मक्खियां अफ्रीका से सिक्कम और उत्तर बंगाल होकर अब बिहार में प्रवेश कर चुकी हैं.
जिले में मंगलवार से अंत्योदय आयुष्मान पखवाड़े की शुरूआत हुई है. पखवाड़े में 20 जुलाई तक शत प्रतिशत अंत्योदय लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा है. इसलिए इसमें जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा.
डायटीशियन की मानें तो हमें अपनी डाइट में कच्ची, ताजी सब्जियां भी शामिल करनी चाहिए. यदि हम इन मौसमी सब्जियों का जूस पिएं तो सेहत के लिए और बेहतर रहेगा. इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि, ताजी सब्जियों के जूस के ही लाभप्रद होता है.
सेना में भर्ती होने के बाद डॉ. एमसी डावर ने अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया. सन 1971 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हुई. तब उनकी पोस्टिंग बांग्लादेश में थी. डॉ. डावर बताते हैं कि, मैंने न जाने कितने घायल जवानों का इलाज किया.
