SNMC Doctors आगरा के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने मरीज की ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’ करके गरीब मरीज की जान बचाई है. यह 172 साल बाद एसएनएमसी की पहली जटिल ऐसी सर्जरी है.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
SNMC Doctors; उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) के डॉक्टर्स ने 172 साल बाद इतिहास रचा है. एसएनएमसी के जटिल ऑपरेशन सीटीवीएस विभाग के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने मरीज की ‘बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी’ करके रिकॉर्ड बनाया है. एसएनएमसी में पहली बार ‘बीटिंग हार्ट (OPCABG) बायपास सर्जरी’ हुई है. कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल का दावा है कि देश में सबसे कम समय में ‘बीटिंग हार्ट (OPCABG) बायपास सर्जरी’ के बाद मरीज की रिकवरी और डिस्चार्ज करने का देश का यह पहला मामला है. सर्जरी के 72 घंटे बाद भी मरीज को एसएनएमसी से छुट्टी दी गई है. अब मरीज ठीक है.
एसएनएमसी के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल ने बताया कि आगरा में जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के बोदला निवासी 66 वर्षीय रतन लाल शर्मा को हृदय रोग से ग्रसित थे. जिसकी चलते 6 माह से उनकी हालत बेहद नाजुक थी. मरीज रतन लाल शर्मा के हृदय की दो मुख्य धमनियां 100% ब्लॉक हो गईं थीं. जिससे हृदय की कार्य क्षमता घटकर महज 35% रह गई थी. जिससे उनकी सर्जरी करना बेहद रिस्की था. मगर, मरीज रतन लाल शर्मा की बीटिंग हार्ट (OPCABG) बायपास सर्जरी की गई. जो करीब 3 घंटे तक चली. जिसमें ‘बीटिंग हार्ट’ तकनीक का उपयोग करके हृदय को बिना रोके और धड़कती अवस्था में ही बायपास किया गया है. एसएनएमसी में पहली सफल ये सर्जरी की गई है. सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी बहुत जल्द हुई है.

SNMC Doctors; 72 घंटे में मरीज किया डिस्चार्ज
कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल का दावा है कि यह देश की संभवतः पहली बीटिंग हार्ट (OPCABG) बायपास सर्जरी है. इसके बाद भी मरीज की बेहद तीव्र रिकवरी हुई है. जिसमें सर्जरी के दूसरे ही दिन (POD-2 + कुछ घंटे) यानी करीब 72 घंटे बाद ही मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया. जबकि, आमतौर पर ऐसी सर्जरी के बाद मरीज को 5 से 7 दिन अस्पताल में रखा जाता है. लेकिन, सर्जरी की सटीकता और उत्कृष्ट ‘पेरिऑपरेटिव केयर’ से मरीज को महज 72 घंटों के भीतर रिकवर करके डिस्चार्ज किया गया. जो चिकित्सा जगत में एक दुर्लभ कार्य है.
बिना रुपये और बिना आयुष्मान कार्ड के मिला नया जीवन
एसएनएमसी के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मरीज रतन लाल शर्मा की
आर्थिक स्थिति कमजोर है. मरीज के पास आयुष्मान कार्ड भी नहीं था. इसलिए, “असाध्य रोग योजना” के तहत मरीज की सर्जरी और पूरा इलाज निःशुल्क किया गया है. जबकि, इस तरह की सर्जरी निजी अस्पतालों में 3 से 4 लाख रुपये में होती है. सरकारी योजना के माध्यम से मुफ्त करके मरीज को नई जिंदगी दी गई. यह उपलब्धि ना केवल मेडिकल उत्कृष्टता का प्रतीक है. बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ते विश्वास का प्रमाण है. एसएन मेडिकल कॉलेज में हृदय की पहली बीटिंग हार्ट सर्जरी सफल रही है. हमारा लक्ष्य है कि अब आगरा के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में जाने की जरूरत ना पड़े.
इस टीम ने की सफल सर्जरी
CTVS सर्जन टीम: डॉ. सुशील सिंघल, डॉ. शिव, डॉ. सुलभ गर्ग, डॉ. आरती.
एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर: डॉ. अपूर्वा मित्तल, डॉ. योगिता, डॉ. अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. अमिता, डॉ. रोहन, डॉ. अखिल, डॉ. विकास यादव.
सहयोगी स्टाफ: सिस्टर प्रमिला, श्वेता, सुमन, प्रिया एवं सहायक सचिन व मोनू.
