World Alzheimer’s Day बात इस बीमारी की, जो न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. आगरा के बुजुर्गों में दिमागी कमजोरी को लेकर चिंता. जानिए Alzheimer’s और dementia के शुरुआती लक्षण, कारण और समय पर जांच क्यों जरूरी है. ।
आगरा, उत्तर प्रदेश.
World Alzheimer’s Day: बार-बार भूलना, नाम याद न रहना, सही शब्द न मिलना, घर का रास्ता भूलना, बातचीत में परेशानी, उदासीनता, चिड़चिड़ापन, फैसले न ले पाना. ताजनगरी के 62 फीसदी बुजुर्ग इसी तरह की दिमागी दिक्कतों के पंजे में जकड़े हैं. महिलाओं और कम आय वर्ग में यह समस्या ज्यादा पाई गई है. विश्व अल्जाइर डे (World Alzheimer’s Day) पर मोबी कैप्सूल की स्पेशल रिपोर्ट में एसएन मेडिकल कॉलेज में की गई रिसर्च के आधार पर कि अल्जाइर बीमारी कितनी खतरनाक हो रही है.
बता दें कि 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर डे बनाया जाता है. इस साल अल्जाइमर डेर की थीम “The Earlier You Know, The More You Can Do: A Dementia Diagnosis Matters” (जितनी जल्दी आप जानेंगे, उतना अधिक आप कर पाएंगे). अल्जाइमर बीमारी कहें तो मस्तिष्क में प्रोटीन के असामान्य जमाव और तंत्रिका कोशिकाओं के नष्ट होने की वजह से होती है.
144 लोगों पर किया गया रिसर्च
आगरा में स्थित एसएन मेडिकल कालेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने 60 साल या उससे अधिक उम्र के 144 लोगों पर अध्ययन किया है. जिसमें 78 पुरुष (54.2 फीसदी) और 66 महिलाएं (45.8 फीसदी) शामिल थीं. उम्र के हिसाब से 60-64 वर्ष के 32, 65-69 वर्ष के 45, 70-74 वर्ष के 40, 75-79 वर्ष के 15 और 80 वर्ष या उससे अधिक के 12 प्रतिभागी शामिल किए गए. यह रिसर्च डॉ. कन्हैया लाल उपाध्याय, डॉ. रेनू अग्रवाल और डॉ. गीतू सिंह समेत अन्य ने किया है. जो इंडियन जर्नल आफ कम्युनिटी हेल्थ के 2025 के अंक में प्रकाशित हो चुका है.
World Alzheimer’s Day: महिलाओं में ये समस्या अधिक
मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, इसमें से 89 यानी 61.8 फीसदी लोगों में काग्नीटिव इंपेयरमेंट पाया गया. जबकि 55 यानी 38.2 फीसदी में यह समस्या नहीं मिली. यदि हम पुरुष और महिला की बात करें तो इनमें से 35 पुरुषों और 54 महिलाओं में यह दिक्कत पाई गई. जबकि, 43 पुरुष और 12 महिलाएं इससे मुक्त मिलीं. कहें तो महिलाओं को इस समस्या से अधिक जूझना पड़ रहा है.
निम्न आर्थिक वर्ग है सर्वाधिक पीड़ित
रिसर्च में में शामिल 91 प्रतिभागी निम्न, 47 मध्यम और 6 फीसदी उच्च आर्थिक वर्ग वाले थे. निम्न वर्ग में 72 मरीज यानी 50 फीसदी, मध्यम वर्ग में 17 यानी 11.8 फीसदी और उच्च वर्ग में कोई भी प्रतिभागी काग्नीटिव इंपेयरमेंट वाले समूह में नहीं पाया गया. इससे पता चलता है कि कमजोर आर्थिक वर्ग वाले बुजुर्गों को ऐसी दिक्कतें आम हो चली हैं.
अधिक वजन भी दे रहा बीमारी
रिसर्च में शामिल तीन लोगों में वजन कम था. 26 में सामान्य वजन पाया गया. जबकि, 38 लोगों में अधिक वजन मिला. 77 लोग मोटापे की श्रेणी में मिले. कम वजन वाले दो, सामान्य वाले 13 (9%), अधिक वजन वाले 25 (17.4%)और मोटापे वाले 25 (17.4%)लोगों में दिमाग से संबंधी दिक्कतें पाई गईं.
बचाव को लिए ये करें
एसएन मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार गुप्ता बताते हैं कि रिसर्च का रिजल्ट डरावना है. इस बीमारी से बचने के लिए हमें सतर्क रहना होगा. इसके बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें.
● व्यायाम:- सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तेज चलें, मध्यम कसरत करें।
● खानपान:- सब्जी, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, मेवे, मछली आदि का सेवन करें।
● परहेज:- अत्यधिक चीनी, नमक और अल्ट्रा प्रोसेस्ड भोजन करने से बचें।
● बीमारियां:- ब्लड प्रैशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रोल को दवाइयों से नियंत्रित रखें।
● पर्याप्त नींद:- सभी वयस्कों को कम से कम 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी है।
● सक्रियता:- पढ़ना, नई चीजें सीखना, संगीत, भाषाएं, पहेलियां करना जरूरी।
● सामाजिकता:- परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों से जुड़े रहें, कार्यक्रमों में हिस्सा लें।
● नशेबाजी:- धूम्रपान से बचें, शराब का सेवन कम करें, सूखे नशे से दूर रहें।
● नियमित जांच:- सुनने, देखने के साथ खून और संक्रमण की जांच कराते रहें।
● सिर सुरक्षा:- बाइक, स्कूटर पर हेलमेट लगाएं, सिर की चोट बचाना जरूरी है।
● दवाइयां:- कुछ दवाएं एकाग्रता पर असर डालती हैं, इनकी समीक्षा कराएं।
विधुर, विधवा और तलाकशुदा में दिक्कतें
अध्ययन में 81 लोग विवाहित, दो अविवाहित और 61 लोग विधवा, विदुर या तलाकशुदा भी शामिल थे. विवाहित लोगों में दिमागी दिक्कत 44 लोगों में पाई गई. इनका प्रतिशत 30.6 रहा. इसके साथ ही अविवाहितों में कोई दिक्कत नहीं पाई गई. जबकि विधवा, विदुर या तलाकशुदा 45 लोगों में दिक्कतें पाने से प्रतिशत 31.3 रहा.
हाथों की पकड़ भी कमजोर पाई गई; रिसर्च में 139 लोगों की दाएं हाथ की पकड़ कमजोर मिली. जिसमें उनके हाथ सामान उठाने में हिल रहे थे. ऐसे 89 लोगों को दिमागी दिक्कतें भी पाई गईं. कुल 5 लोग सामान्य पाए गए लेकिन किसी को मजबूत पकड़ की श्रेणी में नहीं थी. इसी तरह 143 लोगों के बाएं हाथ की पकड़ कमजोर पाई गई. इनका सीधा संबंध दिमाग से पाया गया.
कम पढ़े-लिखे अधिक परेशान पाए गए; रिसर्च में बीमारी और शिक्षा के अंतर में भी कनेक्शन पाया गया. जो कम पढ़े-लिखे लोग हैं. उन्हें बीमारियों ने अधिक घेरा है. जिसमें 35 मरीज उच्च शिक्षा प्राप्त, 61 स्कूल स्तर की शिक्षा वाले, 48 लोग निरक्षर थे। उच्च शिक्षित सात लोगों (4.9 %), स्कूली शिक्षितों 36 (25%) में, निरक्षरों में 46 (31.9 %) में दिक्कतें पाई गईं.
दोस्तों से अलगाव वाले भी बने शिकार; रिसर्च में यह भी सामने आया कि दिमागी दिक्कतों से दूर रखने में दोस्तों, निकट संबंधियों के साथ लगातार मेलजोल मददगार साबित हुआ है. करीब 45 लोग रोजाना दोस्तों से मिलते थे. 90 लोग रोज नहीं मिलते. नौ लोग कभी संपर्क नहीं करते हैं. रोजाना मिलने वाले 31 (21.5%),रोज न मिलने वाले 53 (36.8%)में बीमारियां मिलीं.
बेरोजगारों पर बीमारी की ज्यादा मार: रिसर्च में यह भी सामने आया कि नौकरी, आय और बेरोजगारी का भी सीधा असर दिमाग पर पड़ता है. रिसर्च में 29.2 फीसदी पेशेवर लोग, 37.5 फीसदी कुशल श्रमिक और 37.5 फीसदी बेरोजगार मिले. जिनमें पेशेवर में सिर्फ 6 (4.2 %), श्रमिकों में 39 (27.1 %) और बेरोजगारों में 44 (30.6 %) लोगों में बीमारियां पाई गईं.
