KGMU Conversion Case: केजीएमयू धर्मांतरण मामले में एसटीएफ की जांच रिपोर्ट से खलबली मच गयी है. रिपोर्ट में 13 डॉक्टर्स के नाम हैं. जिससे मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
KGMU Conversion Case: लखनऊ के बहुचर्चित केजीएमयू धर्मांतरण मामले में स्पेशल टॉस्क फ़ोर्स (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट सामने आई है. इससे केजीएमयू में सनसनी फैल गई है. एसटीएफ की सात पेज की रिपोर्ट (KGMU Conversion Case) में शामिल डॉक्टर्स के नामों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाई है. जिसमें कई ऐसे डॉक्टर हैं, जो आज केजीएमयू से बाहर बड़े संस्थानों में अहम पदों पर तैनात हैं. इसके साथ ही एक डॉक्टर कुलपति के पद पर भी हैं. वहीं, कुछ डॉक्टर्स मौजूदा समय में केजीएमयू में विभागाध्यक्ष हैं. रिपोर्ट में कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिन्हें अगले एक से दो महीने में विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने वाली है.
बता दें कि केजीएमयू धर्मांतरण (KGMU Conversion Case) मामले में एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर केजीएमयू प्रशासन करीब 13 डॉक्टर्स पर शिकंजा कसने की तैयारी में है. इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच की प्रक्रिया शुरू होगी. इसके लिए अगले सप्ताह इमरजेंसी कार्यपरिषद की बैठक बुलाई जाएगी.बैठक में आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कमेटी गठित करने पर फैसला लिया जाएगा.
यह था पूरा मामला
केजीएमयू अस्पताल की एक महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया था कि डॉ. रमीज ने शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया. मेरा जबरन गर्भपात (abortion) कराया. इतना ही नहीं, धर्म परिवर्तन (इस्लाम कबूल करने) के लिए दबाव बनाया. पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर ओवरडोज लेकर आत्महत्या की कोशिश भी की थी. इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि KGMU के विभिन्न विभागों में हिंदू महिला डॉक्टरों और स्टाफ को कथित तौर पर निशाना बनाने वाला एक नेटवर्क सक्रिय था. जिसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर तैयार की गई है.
इलाज से ड्यूटी तक में अपने धर्म को दी प्राथमिकता
एसटीएफ की सात पेज की रिपोर्ट में डॉक्टर्स के कामकाज और व्यवहार को लेकर भी कई गंभीर टिप्पणियां की गई हैं. एसटीएफ रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी डॉक्टर अपने धर्म के लोगों को प्राथमिकता देते थे. जिसमें इलाज से लेकर विभागीय जिम्मेदारियां सौंपने तक में कथित तौर पर धर्म के आधार पर पक्षपात किया जाता था. इसके साथ ही ड्यूटी लगाने में भी अपने धर्म के विशेषज्ञों को तरजीह देने की बात सामने आई है.
KGMU Conversion Case: आरोपी विभागाध्यक्षों की कुर्सी खतरे में
धर्मांतरण मामले की गंभीरता को देखकर केजीएमयू प्रशासन एक और अहम मुद्दे पर विचार करेगा. जांच पूरी होने तक आरोपी डॉक्टर विभागाध्यक्ष बने रहेंगे या नहीं? साथ ही वे दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे या नहीं? इस पर भी कार्यपरिषद में निर्णय हो सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में केजीएमयू में कई अहम प्रशासनिक पदों पर बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
