मर्सर ( Mercer) के कराए दुनिया के 227 शहरों में ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग सर्वे-2022’ में मुंबई 127वीं रैंक रही. भारत में खाना और रहना मुम्बई में सबसे महंगा है. इस सूची में दिल्ली की रैंकिंग 155वीं, चेन्नई की रैंकिंग 177वीं और बेंगलुरु की रैंक 178 है.
आगरा में बच्चों की बदली फूड हेविट से उन्हें पेट में दर्द, उल्टी दस्त, अपच, पीलिया, हीमोग्लोबिन कम होना, पेट में अल्सर की शिकायत जैसी अन्य परेशानी सता रही हैं. इसलिए बच्चों को फास्ट-जंक फूड देने से परहेज करें.
अमेरिका में अबॉर्शन कानून के खिलाफ महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं. महिलाओं ने ऐलान किया है कि, यदि कोई पुरुष अपनी पत्नी के अधिकारों के लिए नहीं लड़ रहा तो वो यौन संबंध बनाने के लायक नहीं है. इसलिए महिलाओं का सोशल मीडिया पर #sexstrike कैंपेन ट्रेंड कर रहा है.
मंगलवार से अगले तीन दिन में आगरा और उसके आसपास के तापमान में गिरावट आएगी. मंगलवार शाम से आसमान में घने बादल छाने के साथ ही मानसून की पहली बारिश के आसार बन रहे हैं. जिससे तापमान में गिरावट की संभावना है.
भारत में अमेरिका से ज्यादा मानवीय गर्भपात की व्यवस्था है. भले ही भारत में गर्भपात करना गैरकानूनी है. लेकिन, विशेष परिस्थिति के लिए कोर्ट की इजाजत से ही अबॉर्शन कराया जाता है.
लंदन की ‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी’ के रिसर्चर ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि, नेता का जीवन काल आम आदमी से ज्यादा है. जबकि, 19 वीं सदी के अंत तक नेता और आम आदमी की मत्युदर समान थी.
Health News: MP में प्रेग्नेंट महिलाओं को जांच के लिए मिलेंगे 4 हजार, मप्र सरकार की जानें पूरी योजना
मप्र में स्वास्थ्य विभाग के नए नियमों के मुताबिक, आरसीएच पोर्टल या अनमोल एप पर एएनएम और सरकारी अस्पताल की ओर से जिन गर्भवतियों का पंजीयन एक जुलाई से किया जाएगा. उन्हें नई व्यवस्था के तहत ही मदद मिलेगी.
एक पैर पर दस सैंकड तक खड़े नहीं हो पाना सेहत के लिए ठीक नहीं है. ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन’ में प्रकाशित एक रिसर्च में रिसर्चर ने यह दावा किया है. यह रिसर्च 51 से 75 आयु वर्ग के करीब 1702 लोगों पर की गई.
DGCI ने 28 दिसंबर 2021 को वयस्कों में आपातकालीन स्थिति में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी. 9 मार्च 2022 को कुछ शर्तों के अधीन 12 से 17 वर्ष आयु वर्ग में भी इसके उपयोग को मंजूरी दी.
एम्स की रिसर्च के मुताबिक, 28 फीसदी मानसिक रोगी उपचार के लिए पहली बार में आयुर्वेद डॉक्टर्स के पास पहुंचते हैं. इसके साथ ही 12 फीसदी मनोरोगी ही मनोचिकित्सकों के बजाय एलोपैथी के दूसरे डॉक्टर्स के पास उपचार करने पहुंचते हैं.
