शहरों का तापमान बीते दिनों तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. ऐसे में गर्भवती महिलाओं के शरीर में पानी की कमी शिकायत हुई. उन्हें खूब पसीना आ रहा है. गर्मी की वजह से गर्भवती महिलाओं की हार्ट बीट भी ज्यादा रही. चिकित्सकों की मानें तो गर्मी में गर्भवती महिलाओं का ह्रदय एक मिनट में…
रिसर्च में तमाम ऐसे युवा सामने आए हैं. जिन्होंने इन एप पर दी गई जानकारी के चलते मानसिक बीमारी की दवाएं छोड दीं. जिससे मरीज की परेशानी और बढ़ गई.
शरीर का हर अंग सुदर दिखे. यही हर महिला की चाहत होती है. मगर, कोहनियों का सूखी पपड़ीदार और काला रंग होना शर्मींदगी की वजह बनता है. mobycapsule.com इस आर्टिकल में घरेलू छह DIY हैक्स बताए जा रहे हैं. जिन्हें जरूर ट्राई करें.
बच्चे को यदि दस्त हो रहे हैं तो उसे तत्काल ओआरएस घोल पिलाएं. जिंक की टेबलेट भी दें. जिससे बच्चे में पानी की कमी नहीं होगी. यदि बच्चा ज्यादा परेशान है तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर चिकित्सक से परामर्श जरूर लें.
समर सीजन की इस तेज धूप और गर्मी में आप फैशनेबल और स्टाइलिश दिख सकती हैं. mobycapsule.com के Saturday फैशन के इस आर्टिकल में फैशन डिजाइनर कामिनी सिंह बता रही हैं कि, समर में स्टाइलिश नजर आने के लिए कौन सी बेस्ट एक्सेसरीज हैं.
एक बोतल में अपने बूब्स का पसीना निकालकर भरने में 15 मिनट का समय लगता है. ज्यादा गर्म होने पर एक दिन में पसीने से 10 बोतने भी भर देती हूं. अपनी एक्स रेटेड अनफिल्टर्ड साइट से 500 डॉलर के करीब में बेचती हैं.
टाइप 2 डायबिटीज का औपचारिक रूप से निदान हो सकता है. मगर, तब तक रोगी का मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो चुका होता है. इसलिए डायबिटीज से रोगी के मस्तिष्क में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाने पर तत्काल उसके उपचार शुरू कराएं.
यह खबर हर कपल्स के लिए है. जो मां-बाप बनने का सपना देख रहे हैं या जल्द ही माता-पिता बनने जा रहे हैं. या जिन कपल्स को डॉक्टर ने समय से पहले डिलेवरी से प्रीमैच्योर नवजात की आशंका जताई है. वो अपने प्रीमैच्योर नवजात को कंगारू मदर केयर से ‘संजीवनी’दे सकते हैं.
देश की राजधानी दिल्ली से गुहाना तक किडनी रैकेट चल रहा था. जो जरूरतमंद लोगों की चंद हजार रुपए देकर किडनी निकाल कर महंगी कीमत पर दूसरे जरूरतमंदों को बेचता था. इस खबर में किडनी गैंग की हर करतूत जानें.
, आचार संहिता में यह भी साफ किया गया है कि, डॉक्टरों को अपने मरीज को दवा बेच सकते हैं. इतना ही नहीं, एनएमसी ने आचार संहिता मसौदे में कहा है कि, कोई भी डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों की लिखी दवा बेच नहीं सकता है. वे जेनेरिक दवाएं ही लिखें और बेचें.
