टीबी चैंपियन अब क्षय रोग के प्रति जागरूकता करेंगे. जिससे टीबी को लेकर व्याप्त भेदभाव और भ्रांतियां दूर हों. इसके लिए टीबी चैंपियन अब पोस्टर, पंपलेट, बैज और टैटू का सहारा लेंगे.
कैल्श्यिम की हैवी डोज: किडनी में स्टोन का खतरा, BP और हार्ट की बीमारियां भी जकड़ेंगी, जानें खात बातें
हाइपरकैल्शिमया से हड्डियां कमजोर होती हैं. पैनक्रियाज भी खराब होती है. इतना ही नहीं, कैल्शियम की हैवी डोज से किडनी में स्टोन, हाई बीपी, हृदय और ब्रेन में भी गड़बड़ियां हो सकती हैं.
, टीबी का इलाज है. इस रोग को हम मात दे सकते हैं. यह कोई मुश्किल काम नहीं है. इसके लिए हमें बस नियमित दवाओं का सेवन करना है. खुद की साफ स फाई रखें और इलाज के दौरान जरूरी परहेज भी करें.
आगरा में स्वास्थ्य विभाग की PCPNDT टीम हाथ पर हाथ रखे बैठी है. मगर, हाल में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग और एसटीएफ की कार्रवाई के बाद आगरा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अपनी किरकिरी बचाने के लिए हरकत में आया है.
स्वास्थ्य विभाग ने हीट वेव (लू) को लेकर एडवाइजरी जारी की है. बिना जरूरी काम के धूप में घर से बाहर न निकलें. घर से बाहर निकलें तो पानी पीकर व शरीर को पूरा ढंककर निकलें.
टीबी रोग को जड़ से खत्म करने की मुहिम में आयुष चिकित्सकों की अहम भूमिका रहेगी. इसलिा सरकार ने यूपी में आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी चिकित्सक हैं, जो निजी क्लीनिक संचालक हैं. वे भी अब टीबी मरीजों की सूचना भी निःक्षय पोर्टल पर दर्ज करेंगे.
मैच के दौरान ही किन्वेन झेंग का पीरियड्स (मासिक धर्म) आ गया. जिससे वो अपना सामान्य खेल भी नहीं खेल सकीं. मैच के दौरान पीरियड्स (मासिक धर्म) आने पर महिला खिलाड़ियों की जुबानी, उनकी ही कहानी को लेकर हाल में एक रिपोर्ट जारी हुई.
जोसी प्यूकर्ट का दावा है कि, इस प्रक्रिया में मैंने कोई मेडिकल हेल्प नहीं ली है. मैंने और मेरे पार्टनर ने प्रशांत महासागर में शिशु को जन्म देने का फ़ैसला लिया. मगर, हमने प्रेग्रेंसी की कभी कोई स्कैन भी नहीं कराई. यह पूरा प्रोसेस ’फ़्री बर्थ’ है.
शहरों का तापमान बीते दिनों तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. ऐसे में गर्भवती महिलाओं के शरीर में पानी की कमी शिकायत हुई. उन्हें खूब पसीना आ रहा है. गर्मी की वजह से गर्भवती महिलाओं की हार्ट बीट भी ज्यादा रही. चिकित्सकों की मानें तो गर्मी में गर्भवती महिलाओं का ह्रदय एक मिनट में…
रिसर्च में तमाम ऐसे युवा सामने आए हैं. जिन्होंने इन एप पर दी गई जानकारी के चलते मानसिक बीमारी की दवाएं छोड दीं. जिससे मरीज की परेशानी और बढ़ गई.
