देश में भीषण गर्मी और लू हीट वेव चल रही है. जिससे जनजीवन अस्त व्यस्त है. आए दिन बढ़ रहे तापमान से पशु, पक्षी और मानव का हाल बेहाल है. हीट वेव से बचाने में ये आयुर्वेदिक हेल्थ टिप्स बहुत कारगर हैं.
गर्मी में पसीना आना और शरीर से दुर्गंध आना आम बात हैं. कई ऐसे लोगों होते हैं. जिनके शरीर से पसीने की ऐसी दुर्गंध आती है. जिससे कोई उनके पास बैठना भी पसंद नहीं करता है. मगर, घरेलू नुस्खे अपना कर इसका समाधान कर सकते हैं.
भारत आबादी के मामले में नियंत्रण के करीब पहुंच रहा है. देश अब ‘हम दो, हमारे दो’ के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है. क्योंकि, देश में ‘हम दो, हमारे दो’ का चलन तेजी से बढ़ा है. इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-5 की दूसरी रिपाेर्ट कर रही है.क्योंकि, परिवार नियोजन कार्यक्रम के सातवें…
Mothers Day 2022: मां और बच्चों का अनमोल रिश्ता है. मां के दूध का कर्ज बच्चा कई नहीं अदा कर सकते हैं. मां की ममता और प्यार निश्वार्थ होता है. मां अपनी संतान की परवरिश में अपना हर सुख त्याग देती है. मां की ममता और प्यार को याद करने के लिए हर साल मई…
केंद्र और राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं यूपी में गरीबों की जिंदगी बदल रही हैं. आगरा में 45 वर्षीय अनवारी और 11 साल के शिवा को सरकार की आयुष्मान योजना ने नई जिंदगी दी है. इलाज के अभाव में अनवारी और शिवा असहनीय दर्द और तकलीफ सह रहे थे.
सन 1922 में सोवियत संघ ने नेशनल पॉलिसी में कुछ सेक्टर्स में पीरियड लीव देना शुरू कर दिया था. इंडोनेशिया में पीरियड्स लीव की शुरुआत सन 1948 में हुई थी. इसके बाद तमाम देश में महिलाओं का दर्द समझकर पीरियड्स लीव देने का प्रावधान किया है. जिसकी वजह से आज ऑस्ट्रेलिया, चीन, रूस, ब्रिटेन, ताइवान,…
सीटीजी आम तौर पर गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में कराया जाता है. यह एक सामान्य टेस्ट है. जिसमें दर्द नहीं होता और न ही शरीर में अंदर कुछ डाला जाता है. यह जांच गर्भावस्था के दौरान शिशु की स्थिति जानने के लिए होती है.
भीषण गर्मी और हीट वेव से बच्चे, युवा, महिला, पुरुष और बुजुर्ग सभी परेशान हैं. ऐसे में छह माह से छोटे शिशु का ख्याल रखना बेहद जरूरी है. क्योंकि, वो अपनी पीडा किसी से साझा नहीं कर सकते हैं. हीट वेव के प्रकोप से शिशुओं को बचाने के लिए आसान उपाय हैं.
शिद्दत से मेहनत करने पर सफलता जरूर कदम चूमती है. परेशानियां अस्थाई रुकवाट होती हैं. लगन और लक्ष्य निर्धारण से सफलता मिलती है. इसका सटीक उदाहरण है इंदौर की अंकिता नागर है. जो दो बार असफल होने पर भी निराश नहीं हुई और मेहनत के दम पर तीसरे प्रयास में जज बनी हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में हर साल तंत्रिका संबंधी विकार से लाखों लोग प्रभावित होते हैं. वैज्ञानिकों ने समय और घर बैठे ही मोबाइल से न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य समस्याएं पता हों. इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक ऐसा मोबाइल एप बनाया है. जिसकी मदद से न्यूरोलॉजिकल विकारों का आसानी से पता लगाया जा सकता है.
