SNMC News; एसएनएमसी में OBGY के एक्सपर्ट डॉक्टर्स ने 'प्लेसेंटा परक्रेटा' बीमारी से ग्रसित गर्भवती की सफल सर्जरी की. जिसमें कई अन्य विभाग के एक्सपर्ट की मदद ली गई.
आगरा, उत्तर प्रदेश.
SNMC News; आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. विभाग की डॉक्टर्स की टीम ने बेहद गंभीर और जोखिम भरी गर्भावस्था की सर्जरी सफलतापूर्वक करके एक मां की जान बचाई. जिसकी चर्चा खूब हो रही है. जो ‘प्लेसेंटा परक्रेटा’ (placenta percreta) नाम की बीमारी है. जिसमें बच्चे के जन्म के दौरान सबसे खतरनाक स्थितियों में बनती है. इस पूरे ऑपरेशन की योजना OBGY विभाग (SNMC News) की टीम ने ही किया. जिन्होंने ज़रूरत पड़ने पर अन्य विभागों की मदद लेकर मरीज़ की जान बचाई.
बता दें कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे को पोषण देने वाली नाल (प्लेसेंटा) को गर्भाशय की दीवार से जुड़ा होना चाहिए. लेकिन कुछ मामलों में यह नाल गर्भाशय में बहुत गहराई तक धंस जाती है. जिससे आसपास के अंगों को भी नुकसान पहुंचता है. जिससे डिलीवरी के समय भारी रक्तस्राव होने का खतरा रहता है. जो एक गर्भवती की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. दुनियाभर में मातृ मृत्यु के कारणों में से लगभग 7% मामले प्लेसेंटा एक्रेटा स्पेक्ट्रम से जुड़े होते हैं.
SNMC News; मूत्राशय (ब्लैडर) तक पहुंच गया था गर्भनाल
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) की पूर्व एचओडी प्रो. रिचा सिंह ने बताया कि
रोगी का नाम नेहा है. उसकी उम्र 25 साल है. नेहा दूसरी बार गर्भवती (G2) हुई थी. पूर्व में एक बार सिजेरियन सेक्शन की हिस्ट्री के साथ 34 सप्ताह की गर्भावस्था में योनि मार्ग से रक्तस्राव/स्पॉटिंग की शिकायत के साथ जिला महिला चिकित्सालय (DWH), मथुरा से रेफर होकर आई. जब मरीज़ यहां पर आई तो उसकी स्थिति और भी जटिल थी, क्योंकि नाल गर्भाशय से आगे बढ़कर पास के अंगों और मूत्राशय (ब्लैडर) तक पहुंच चुकी थी. भारी खून बहने का खतरा पहले ही भांपते हुए OBGY विभाग की टीम ने पूरी सर्जिकल योजना तैयार की. ऑपरेशन के सबसे नाज़ुक पल में OBGY टीम ने हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiovascular Surgeons) की मदद से एक खास तकनीक अपनाई. जिसे ‘एऑर्टिक कंप्रेशन’ जिसमें रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए महाधमनी पर क्लैम्प लगाया गया. जिसमें शरीर की मुख्य रक्त वाहिनी (एऑर्टा) को कुछ समय के लिए दबाकर पेल्विक हिस्से में खून के बहाव को नियंत्रित किया गया.
ऑपरेशन सफल होने से बची गर्भवती की जान
SNMC News; सर्जरी करने वाली टीम में शामिल प्रो. पूनम यादव ने बताया कि टीम ने सूझबूझ और रणनीति बनाकर बिना ज्यादा खून बहे, आराम से ऑपरेशन पूरा किया. जिससे ही गर्भवती की जान बची और ऑपरेशन सफल रहा. ऐसे गंभीर मामलों में सही समय पर सही फैसला लेना और ज़रूरत पड़ने पर दूसरे विभागों को साथ लेकर चलना, यही किसी भी टीम की असली ताकत होती है. OBGY टीम ने यह बखूबी साबित किया. टीम में शामिल डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे हाई-रिस्क मामलों को हमेशा बड़े और अनुभवी अस्पतालों में ही संभालना चाहिए, जहां खून, विशेषज्ञ डॉक्टर और ज़रूरी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध हों. OBGY विभागाध्यक्ष (HOD) प्रो. शिखा सिंह के सहयोग के लिए सभी विभाग और डॉक्टर्स का आभार व्यक्त किया.
सर्जरी करने वाली टीम
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) की मुख्य सर्जिकल टीम में प्रो. रिचा सिंह, प्रो. पूनम यादव, डॉ. अभिलाषा यादव रहीं
सहयोगी विभाग में हृदय शल्य चिकित्सा (CTVS): प्रो. अतुल गुप्ता.
यूरोलॉजी: डॉ. अभिषेक पाठक, डॉ. विजय त्यागी .
एनेस्थीसिया: प्रो. राजीव पुरी, डॉ अतिहर्ष मोहन अग्रवाल, डॉ. विनीता, डॉ. अमिता सिंह.
यह सफलता दिखाती है कि प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (OBGY) की टीम अपनी विशेषज्ञता, तैयारी और सही समय पर लिए गए फैसलों से कैसे एक मां की जान बचा सकती है. टीम ने संस्थान के प्रमुख, प्राचार्य एवं डीन प्रो. प्रशांत गुप्ता के संकाय सदस्यों को निरंतर प्रोत्साहन, मार्गदर्शन एवं सहयोग देने के लिए हृदय से आभारी है.
